लोग आपकी कीमत तब समझते हैं, जब आप मिलना बंद कर देते हैं


 

         (  यह बात कड़वी है लेकिन सच है।)


         ज़िंदगी में बहुत बार ऐसा होता है कि

       हम किसी के लिए हमेशा available रहते हैं—

                        कभी कॉल पर,

                         कभी मैसेज पर,

                          कभी फोन पर 

                        हम सोचते हैं कि

                 शायद हमारी presence

                      उन्हें अच्छी लगे

                 लेकिन सच्चाई यह है कि

जो चीज़ आसानी से मिलती है, उसकी कदर कम हो जाती है।


        जब आप हमेशा मौजूद रहते हैं…

      जब आप हर बार हां कहते हैं,

       हर बार समय निकालते हैं,

      हर बार खुद को पीछे रख देते हैं—

     तो सामने वाला धीरे-धीरे आपको

     ज़रूरत नहीं, आदत समझने लगता है।

  और आदत की सबसे बड़ी समस्या यह है कि

         उसका एहसास तब होता है


 लोग आपकी अच्छाई नहीं, आपकी कमी महसूस करते हैं

                 यह दुनिया बड़ी अजीब है।

    यहां लोग आपकी अच्छाई की तारीफ नहीं 

                    जब तक आप:

                उनके लिए खड़े रहते हैं

                 उनकी बातें सुनते हैं

           उनकी गलती भी समझ लेते हैं

        तब तक सब normal रहता है।

               लेकिन जिस दिन आप:

            कॉल उठाना कम कर देते हैं

              मिलने से मना कर देते हैं

            या चुपचाप पीछे हट जाते हैं

          उसी दिन सवाल शुरू होते हैं।

           आजकल तुम दिखते नहीं हो?

       क्या हुआ, बात भी नहीं करते?


      आपकी मौजूदगी की आदत बन चुकी होती है

                      सच्चाई यह है कि

              लोग आपको miss नहीं करते,

         बल्कि उस comfort को miss करते हैं

           जो आपकी वजह से मिला करता था।

                      आपका सुनना,

                     आपका समझना,

                आपका बिना शर्त साथ देना—

   ये सब उनकी ज़िंदगी का हिस्सा बन चुका होता है।

         लेकिन जब आप अचानक हट जाते हैं,

                तो उन्हें एहसास होता है कि

               आप सिर्फ एक इंसान नहीं थे,

                    आप एक सहारा थे।


       खुद को हर बार साबित करना बंद कीजिए

        कई लोग ज़िंदगी भर यही गलती करते हैं—

             हर रिश्ते में खुद को साबित करना।

                        मैं अच्छा हू

                मैं साथ निभा सकता हू

                 मुझ पर भरोसा करो

              लेकिन सच्चाई यह है कि

            जो आपको समझना चाहता है,

          उसे साबित करने की ज़रूरत नहीं होती।

              और जो आपको हल्के में ले रहा है,

            वो आपके लाख कोशिशों के बाद भी

                आपकी कीमत नहीं समझेगा।


              दूरी कभी-कभी ज़रूरी होती है

              दूरी का मतलब नफ़रत नहीं 

                    कभी-कभी दूरी

     self-respect की सबसे बड़ी पहचान होती है।

जब आप खुद से पूछते हैं— क्या मैं ही हमेशा adjust कर                               रहा हू

         क्या मेरी भी कोई अहमियत है?

         तो वहीं से दूरी की शुरुआत होती है।

            और हैरानी की बात यह है कि

             जिस दिन आप पीछे हटते हैं,

          उसी दिन लोग आगे बढ़ने लगते हैं।


        आपकी खामोशी बहुत कुछ सिखा देती है

                  जब आप बोलते रहते हैं,

     तो लोग आपकी बातों को अनसुना कर देते हैं।

             लेकिन जब आप चुप हो जाते हैं,

          तो आपकी खामोशी सवाल बन जाती है।

   लोग सोचने लगते हैं— ये अचानक बदल क्यों गया?

           क्या हमने इसे हल्के में ले लिया?

                      आपकी खामोशी

                  उन्हें वो जवाब दे देती है

           जो आपकी बातें कभी नहीं दे पाईं।


        हर रिश्ते में खुद को खोना ज़रूरी नहीं

                 प्यार, दोस्ती, रिश्ता—

            इन सबका मतलब यह नहीं कि

               आप खुद को मिटा दें।

          अगर आप हर बार खुद को तोड़कर

                  दूसरों को जोड़ रहे हैं,

        तो एक दिन आप पूरी तरह टूट जाएंगे।

याद रखिए— जो रिश्ता आपको आपकी कीमत भूलने पर                              मजबूर कर दे,

            वो रिश्ता निभाने लायक नहीं होता।


        लोग आपकी कीमत तब समझते हैं…

                      जब आप:

         हर बार available नहीं रहते

   बिना वजह explain करना बंद कर देते हैं

  और खुद को पहली priority बना लेते हैं

             आपका पीछे हटना

       उनके लिए shock बन जाता है।

          तभी उन्हें एहसास होता है कि

         आप सिर्फ कोई option नहीं थे,

   आप उनकी ज़िंदगी का एक अहम हिस्सा थे।


           आख़िरी बात (सबसे ज़रूरी)

      खुद को इतना भी सस्ता मत बनाइए

      कि हर कोई आपको इस्तेमाल कर ले।

                 आपकी value

                आपके देने से नहीं,

        आपके ना देने से समझ आती है।

   अगर कोई आपको खोने के डर से नहीं बदलता,

                     तो यकीन मानिए—

       वो आपको पाने के काबिल भी नहीं था।


      लोग आपकी कीमत तब नहीं समझते

               जब आप साथ होते हैं,

                बल्कि तब समझते हैं

          जब आप मिलना बंद कर देते हैं।


      अगर आपको यह अच्छा लगा हो,

      तो इसे उस इंसान तक ज़रूर पहुंचाएं 

जिसे आज इसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत है।”

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

अगर लोग आपका फायदा उठाते हैं, तो यह पोस्ट ज़रूर पढ़िए

सकारात्मक सोच कैसे विकसित करें? (10 Proven तरीके जो सच में काम करते हैं)

लोगों को अपनी लत कैसे लगाई जाती है